पं. दीनदयाल व पैरामाउंट एकेडमी में केक काटकर मनाया शिक्षक दिवस
-शिक्षकों को प्रशस्ति-पत्र व शिल्ड देकर किया गया सम्मानित
महराजगंज। जिले के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में शुक्रवार को शिक्षक दिवस धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। पं. दीनदयाल इण्टर कॉलेज और दि पैरामाउंट एकेडमी में दीप प्रज्वलन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, नाट्य मंचन, केक काटने और शिक्षकों को सम्मानित करने के कार्यक्रम हुए, जिनमें गुरुजनों के महत्व और योगदान को रेखांकित किया गया।
पं. दीनदयाल इण्टर कॉलेज में शिक्षक दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ डायरेक्टर दुर्गेश सिंह और प्रधानाचार्य डॉ. शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन कर किया। संबोधन में दुर्गेश सिंह ने कहा कि माँ के बाद शिक्षक ही बच्चे की प्रथम पाठशाला होता है और शिक्षक छात्रों को आदर्श नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डॉ. शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊँचा है, क्योंकि वे त्याग और सेवा के माध्यम से छात्रों के सर्वांगीण विकास हेतु समर्पित रहते हैं। छात्र-छात्राओं ने नृत्य, भाषण, नाटक और गीत प्रस्तुत कर शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त किया। एक शिक्षक की भूमिका नाट्य प्रस्तुति ने दर्शकों को भावुक कर दिया। बच्चों ने केक काटकर और उपहार भेंट कर उत्सव मनाया। अंत में शिक्षकों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया तथा संस्था ने शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्टता की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प लिया।
वही दी पैरामाउंट एकेडमी में शिक्षक दिवस बड़े उत्साह और धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती एवं डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन से हुई। इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्या नेहा सिंघानिया, इंजीनियर आकाश सिंह एवं दुर्गेश सिंह मौजूद रहे। दुर्गेश सिंह ने शिक्षकों को शिल्ड देकर सम्मानित किया और कहा कि शिक्षक समाज के निर्माता होते हैं, जो बच्चों को सही दिशा दिखाकर उन्हें डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक और नेता बनने की राह पर अग्रसर करते हैं। कक्षा 10 के विद्यार्थियों ने शिक्षकों के सम्मान में मनोरंजक खेलों का आयोजन किया। सभी शिक्षकों ने बच्चों के साथ मिलकर केक काटकर अपना आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे। शिक्षक दिवस का उद्देश्य शिक्षकों के योगदान को सम्मान देना और उनके महत्व को स्मरण करना है।
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